"तुझको आगे बढ़ना होगा" नरेश मलिक


शायर, कवि एवं लेखक नरेश मलिक


तुझको आगे बढ़ना होगा
हर बाधा से लड़ना होगा
तिमिर हो चाहे कितना गहरा
तुझको उससे भिड़ना होगा l


फैलेगा उजियारा इक दिन
ऐसा धीरज धरना होगा
आंधी तूफानों के आगे
चट्टानों सा अड़ना होगाI


तुझको आगे बढ़ना - - - -


बदले भारत बदलें लोग
प्रण नया अब करना होगा
छोड़ के हर विचार पुराना
इतिहास नया अब गढ़ना होगाl


तुझको आगे बढ़ना------


कोई साथ चले ना चले
पर तुझको निरंतर चलना होगा
एकल दीप की ज्योति जैसे
हर पल तुझको जलना होगाl


तुझको आगे बढ़ना-----


घोर निराशाओं में तुझको
आशा दीप जलाना होगा
करके मर्दन संत्रासों का
सिंह समान गर्जना होगाl


तुझको आगे बढ़ना----


देश की माटी चंदन सोना
इसका वंदन करना होगा
माँ भारती के लालों को
अब घर घर क्रन्दन करना होगाl


तुझको आगे बढ़ना------


काली काली काल रात में
अटल पुंज फैलाना होगा
हारे मन की हार को
जीत का स्वप्न दिखाना होगाl


तुझको आगे बढ़ना----


जागे हर पल भाव जीत का
ऐसी लगन लगाना होगा
अपनी दृढ़ शक्ति से तुझको
हार का भाव भुलाना होगाI


तुझको आगे बढ़ना----


पल पल जलकर अग्नि जैसे
खुद का बदन तपाना होगा
दूर हटे अंधियारा देश का
सूरज जैसे बनना होगाl


तुझको आगे बढ़ना----


रोके जो पथ दुश्मन तेरा
उसको शीश गवांना होगा
बन विजयी हर रण का तुझको
विजयी शंख बजाना होगाl


तुझको आगे बढ़ना-----


थाम के दामन आशाओं का
आशा पथ पर चलना होगा
कर आलोकित पथ को अपने
जुगनू जैसे जलना होगाl


तुझको आगे बढ़ना-----


ऊंचे ऊंचे खड़े शिखर हों
ऊंचाइयों से भरी डगर हो
हिमख़न्डों की चीर के छाती
हर रस्ता सुगम बनाना होगाl


तुझको आगे बढ़ना-----


कर्म के पथ पर चलना होगा
कर्म वेग सा करना होगा
अर्जुन जैसा बनकर तुझको
धारण अस्त्र अब करना होगाl


तुझको आगे बढ़ना------


देकर प्राणों की आहुति
वरण मौत का करना होगा
गर्व करे हर भारतवासी
ऐसी गाथा रचना होगाl


तुझको आगे बढ़ना होगा
हर बाधा से लड़ना होगा
तिमिर हो चाहे कितना गहरा
तुझको उससे भिड़ना होगाl