सुभाष चन्द्र बोस के जीवन से हमें अनेक प्रकार की प्रेरणायें मिलती है: डॉ.जीतराम भट्ट


नई दिल्ली, नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 122वीं जयंती के अवसर पर बुधवार को दिल्ली संस्कृत अकादमी द्वारा झण्डेवाल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अकादमी के सचिव डॉ.जीतराम भट्ट ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुभाष चन्द्र बोस के जीवन से हमें अनेक प्रकार की प्रेरणायें मिलती है।


डॉ. भट्ट ने आगे कहा कि देश सेवा के लिये सिविल सर्विस छोड़ने कर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़ गए। सुभाष चंद्र बोस महात्मा गांधी के अहिंसा के विचारों से सहमत नहीं थे। महात्मा गाँधी और सुभाष चंद्र बोस के विचार भिन्न-भिन्न थे लेकिन वे यह अच्छी तरह जानते थे कि महात्मा गाँधी और उनका मकसद एक है, यानी देश की आजादी। सबसे पहले गाँधीजी को राष्ट्रपिता कह कर नेताजी ने ही संबोधित किया था।


इस अवसर पर राजकुमार द्विवेदी ने कहा कि नेताजी के जीवन से मिलने वाली शिक्षाये हमें प्रेरित करती रहती है। सक्रिय राजनीति में आने से पहले नेताजी ने पूरी दुनिया का भ्रमण किया। वह 1933 से 36 तक यूरोप में रहे। सुभाष चंद्र बोस ने 1937 में एमिली से शादी की। नेता ने आजाद हिंद फौज का पुनर्गठन किया। महिलाओं के लिए रानी झांसी रेजिमेंट का भी गठन किया जिसकी लक्ष्मी सहगल कैप्टन बनी। नेताजी के नाम से प्रसिद्ध सुभाष चन्द्र ने सशक्त क्रान्ति द्वारा भारत को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर, 1943 को आजाद हिन्द सरकार की स्थापना की तथा आजाद हिन्द फौज का गठन किया इस संगठन के प्रतीक चिह्न पर एक झंडे पर दहाड़ते हुए बाघ का चित्र बना होता था। नेताजी ने युवाओं को आजादी के लिये प्रेरित किया।


इस अवसर पर भारत भूषण ने कहा कि वे हिन्दी को बहुत जाहता थे सुभाषबाबू हिन्दी पढ़ लिख सकते थे, बोल सकते थे, पर वह इसमें बराबर हिचकते और कमी महसूस करते थे। वह चाहते थे कि हिन्दी में वह हिन्दी भाषी लोगों की तरह ही सब काम कर सकें। एक दिन उन्होंने अपने उदगार प्रकट करते हुए कहा, यदि देश में जनता के साथ राजनीति करनी है, तो उसका माध्यम हिन्दी ही हो सकती है।