राजधानी पंजाबी परिवार के सितारे केवल कृष्ण अरोड़ा (टीटू प्रधान)

पंजाबी समुदाय में टीटू प्रधान के नाम से विख्यात केवल कृष्ण अरोड़ा किसी परिचय के मोहताज नहीं है। इनका जन्म 22 अक्टूबर 1967 को दिल्ली के रमेश नगर में हुआ, जबकि इनके पूर्वज पाकिस्तान के मुलतान शहर के थे जो कला, सौदर्य और आध्यात्म का केन्द्र कहा जाता है। इन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध मोती लाल नेहरू कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की और रोहिणी सैक्टर-3 के वर्धमान अँड प्लाजा के एरो के स्पेयर पार्टस का अपना होलसेल व्यवसाय करते हैं।


आप पंजाबी सभा, रोहिणी के प्रधान होने के साथ-साथ दिल्ली की कई सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आप शिव सनातन धर्म मंदिर अवंतिका, और आर.डब्ल्यू.ए. के प्रधान भी हैं। स्वभाव से सरल, ईमानदार और जुझारू प्रवृत्ति का होने की वजह से आपने वह दौर भी देखा है जब दिल्ली में स्व. मदन लाल खुराना यहां के मुख्यमंत्री थे। और उनमें पंजाबियों के साथ-साथ अन्य समुदायों को एकजुट करने की प्रवृत्ति थी। मैं चाहता हूं कि पंजाबी अपनी ताकत को बढ़ाएं और एक दूसरे के दु:ख सुख में शरीक हों। मुझे इस बात का गर्व है कि पंजाबी कौम ने कभी किसी सरकार से आरक्षण नहीं मांगा। ये ऐसी कौम है जो बंटबारे के समय अध्यक्ष पंजाबी सभा रोहिणी यहां आई थी तो लोग इसे शरणार्थी कहा करते थे लेकिन पंजाबी कौम ने अपनी मेहनत से वह टैग हटा दिया और लोग अब इन्हें पुरूषार्थी कहते हैं। यद्यपि पंजाबी समुदाय के लिए पंजाबी अकादमी काफी कुछ कर रही है। तो भी पंजाबियों को अपने त्यौहार मिल जुलकर मनाने चाहिये। मुझे इस बात का बड़ा दुःख लगता है कि जिस सरदार भगत सिंह ने देश की आजादी के लिए हंसते-हसंते अपनी जान दे दी, उन्हें अभी तक सरकार ने शहीद का दर्जा तक नहीं दिया। इनका कहना है कि मेरे पिता स्व. सीताराम अरोड़ा तथा माता सत्यरानी के दिये संस्कार ऐसे हैं जिन से हमारा परिवार आज भी हर सुख-दु:ख के मौके पर एक रहता है। मेरी बहन ममता बत्रा आज भी गरीबों व जरूरतमंद लोगों की मदद करने से पीछे नहीं रहतीं और मेरी पत्नी ऑल इंडिया हॉस्पिटल में एक इंजीनियर हैं जिन्होंने 10 साल पहले वहां से 8 लड़कियों का मैंगापन दूर करवाया और उनकी शादियां तक करवाई। इसी तरह एक बार जब अवंतिका के मकानों को तोड़ने का ऑर्डर आया और उनमें से 112 मकान तोड़ दिये गए, तो 12 हमने कोर्ट में केस डाला और जीत गए। आज अवंतिका में ही पंजाबियों के रिहायशी और कारोबारी ठिकाने काफी अच्छे हैं। हमने अपने वर्द्धमान प्लाजा को भी ऐसा मार्कीट हब बना दिया है। जहां ग्राहकों को कोई असुविधा नहीं होती। पंजाबी लोग शुरू से ही अच्छा खाने पीने के शौकीन रहे हैं और इन की दिलेरी भी जगजाहिर है। यह अच्छी बात है कि राजधानी पंजाबी परिवार भी सभी पंजाबियों को एक मंच पर लाने का काम कर रहा है। वैसे मेरा मानना है कि जीवन में किसी को रूलाकर आप यदि हवन भी करवाओगे तो उससे कोई फायदा नहीं है। परंतु यदि आपने किसी एक आदमी को हंसा दिया तो फिर आपको अगरबत्ती भी जलाने की जरूरत नहीं रहेगी। प्रस्तुति-जगदीश चावला