दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष शीला दीक्षित ने कहा


नई दिल्ली, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष शीला दीक्षित ने आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि आप पार्टी ने दिल्लीवासियों को लोकसभा चुनाव में लुभाने के लिए बिजली आधी दरों पर उपलब्ध कराने के झूठे वायदे कर रही है। दीक्षित ने कहा कि चार वर्ष पहले दिल्ली विधानसभा के चुनावों के समय उपभोक्ताओं को बिजली आधी दरों पर मुहैया कराने की बात आप पार्टी के मुखिया केजरीवाल ने कही थी। उन्होंने कहा कि आज 4 वर्ष बीत जाने के बाद भी केजरीवाल सरकार सिर्फ अखबारों में विज्ञापनों में बिजली को आधी दरों पर उपभोक्ताओं को देने दावा कर रहे है, लेकिन वास्तविकता यह है कि उपभोक्ताओं को बिजली पहले से भी कहीं अधिक मंहगी मिल रही है।


प्रदेश कार्यालय राजीव भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए शीला दीक्षित ने कहा कि आप पार्टी की दिल्ली सरकार दिल्ली के उपभोक्ताओं को बिजली में सब्सिडी देने की बात कहती है जबकि उपभोक्ताओं को फिक्स चार्ज, नए मीटर सुरक्षा शुल्क, अपलोकड शुल्क, सेवा लाईन शुल्क और पेंशन फंड जैसे अतिरिक्त शुल्क देने पड़ रहे है। उन्होंने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं से इतने अधिक शुल्क के के तहत अत्यधिक राशि एकत्रित करने के बावजूद दिल्ली सरकार ट्रांसमीशन की लाईन बेहतर करना और बिजली वितरण नेटवर्क को सही तरीके से मुहैया नही करा रही है।


संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित के साथ कार्यकारी अध्यक्ष हारुन यूसूफ, देवेन्द्र यादव और राजेश लिलौथिया, दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री मंगतराम सिंघल, रामकांत गोस्वामी, मुख्य प्रवक्ता शर्मिष्ठा मुखर्जी, प्रवक्ता जितेन्द्र कुमार कोचर, पूजा बाहरी और विजय मोहन भी मौजूद थे। शीला दीक्षित ने पिछले साढ़े चार वर्षों में भाजपा के सातों सांसदों का दिल्ली के विकास में योगदान पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने केजरीवाल सरकार की तरह अपने कार्यकाल में दिल्ली के लिए कुछ नही किया, अब वक्त आ गया है जब दिल्लीवासी भाजपा के गैर जिम्मेदार सांसदों की सच्चाई को जानने के बाद अपने अधिकारों की प्राप्ति एवं दिल्ली के गौरव के लिए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों को भारी बहुमत से विजयी बनाऐ।
शीला दीक्षित ने कहा कि कांग्रेस शासन काल में दिल्ली सरकार दिल्ली विद्युत बोर्ड के सेवानिवृत कर्मचारियों को अपने अधिकृत फंड से पेन्शन देती थी। लेकिन आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार बड़ी चालाकी से बिजली उपभोक्ताओं से सेवानिवृत कर्मचारियों के लिए पेन्शन हेतू फंड ले रही है, जो बिजली उपभोक्ताओं से दिन के उजाले में डकैती है। शीला दीक्षित ने कहा कि दिल्ली में उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान रेजीडेन्ट वेलफेयर एसोसिएशन की बैठकों में उठाई गई मांगों को दिल्ली सरकार ने उचित माना था, लेकिन आम आदमी पार्टी केवल शिकायतें दर्ज करती है, और उसके नुमांईदें इन शिकायतों को देखते हुए कोई कार्रवाही नही करते।


शीला दीक्षित ने आगे विस्तार से बताते हुए कहा कि कांग्रेस शासन काल में उपभोक्ताओं को बिजली के बिल दो महीने में एक बार बात आता था लेकिन केजरीवाल सरकार द्वारा बिजली उपभोक्ताओं से अधिक पैसे वसूलने के लिए बिजली के बिल को एक महीने की मासिक बिलिंग में बदल दिया गया। उन्होंने कहा कि मासिक बिलिंग प्रणाली के तहत बिजली उपभोक्ताओं को अधिक राशि देनी पड़ रही है जबकि दिल्ली में कांग्रेस सरकार के समय में दो महीने के बिलिंग चक्र में बिल कम देना पड़ता था। दीक्षित ने कहा कि दिल्ली की कांग्रेस सरकार और उपराज्यपाल यदिल्ली में संक्षिप्त राष्ट्रपति शासन कालद्ध द्वारा 400 यूनिट तक की सब्सिडी प्रदान की जाती थी, परंतु आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार बिजली उपभोक्ताओं को 400 यूनिट तक की सब्सिडी देने की बात विज्ञापनों के द्वारा खुद शुरुआत करने का दावा कर रही है। जबकि सच्चाई यह है कि यह व्यवस्था पहले से ही लागू है।


शीला दीक्षित ने कहा कि आप पार्टी की दिल्ली सरकार ने बिजली दरों में फिक्स चार्ज को 50 से 500 प्रतिशत तक बढ़ाया है, (विस्तृत चार्ट संलग्न है) जबकि मीटर सुरक्षा और अपलोड शुल्क को भी 50 से 200 प्रतिशत तक बढ़ाए दिए गए है। शीला दीक्षित ने कहा कि फिक्स चार्ज में बढ़ौत्तरी के कारण पेन्शन फंड और सरचार्ज में भी वृद्धि की गई है। (विस्तृत चार्ट संलग्न है) शीला दीक्षित ने मांग की कि आप पार्टी की दिल्ली सरकार बिजली उपभोक्ताओं को भ्रमित करने की बजाए उनसे बिजली की दरें आधी करने के अपने वायदों को पूरा करे और बढ़ाऐ गए फिक्स चार्ज और सुरक्षा राशि को वापस ले। आप पार्टी की दिल्ली सरकार जानबूझकर बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डाल रही है। शीला दीक्षित ने फिर मांग की कि आप पार्टी की दिल्ली सरकार को बिजली उपभोक्ताओं से दिल्ली विद्युत बोर्ड के रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए पेन्शन फंड लेना तुरंत प्रभाव से बंद करे। क्योंकि दिल्ली सरकार स्वयं बाध्य है कि वह दिल्ली विद्युत बोर्ड के रिटायर्ड कर्मचारियों को पेन्शन दे, और उसे बिजली उपभोक्ताओं से एकत्रित किया गया पैसा अपने फंड के खाते को उपभोक्ताओं को वापस करना चाहिए।


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